Friday, 23 December 2011

Raja Ram Mohan Roy

राजा राम मोहन रॉय ( १७७२ - १८३३ )

राजा राम मोहन रॉय का जन्म एक प्रतिष्ठित वैश्नाविय बंगाली घराने में सन २२ मई १७७२ इ. स. को हुआ था| वह संस्कृत, पर्सियन और अंग्रेजी के प्रचिलित अभ्यासक थे| उन्हें अरबी,लातिन और ग्रीक भाषाएँ भी आती थी| उन्होंने हिन्दू धर्म की विभिन्न पुस्तकें जिन्ह्में वेड और उपनिषद् भी शामिल है| उन्होंने दुसरे धर्मो का आदर करते हुए अलग - अलग धर्मग्रंथो का भी आभ्यास किया| सन १८०५ मे उन्होंने यास्त इंडिया कंपनी मे अपनी पहली नौकरी की और सफलता से एक ऊँचे औधे तक पहुंचे| उनकी मौत सन १८३३ मे इंग्लैंड मे हुई| उस समय वो अपनी जिंदगी की सबसे प्रचिलित केस याने की मुग़ल शासक अकबर द्वितीय के लिए लाध रहे थी|

राजा राम मोहन रॉय यह नए भारत के सबसे पहले समाज सुधारक थे | इस लिए उन्हें " नए भारत का पिता" यह उपाधि दी गयी है | राजा राम मोहन रॉय सामाजिक एकता और मानवता के उसूलो को मानते थे और उनकी सोच यह हमेशा वैज्ञानिकता पर अवलंबित थी | वह पूर्व और पश्चिमी संस्कृतियों का एक अनोखा  और अचूक मिश्रण
थे|

राजा राम मोहन रॉय ने 1825 मे  भ्रमो समाज के स्थापना करते हुए  अपना जीवन सामाजिक तथा धार्मिक सुधर के कार्य मे झोक दिया | उन्होंने बहुदेववाद तथा मूर्ति पूजा की निंदा करते हुए " एक ईश्वर "की संकल्पना को प्रचिती दी | उनकी धार्मिक संकल्पंओमे हिन्दू, इस्लाम, क्रिस्ती और यूरोपीय तत्वज्ञान की सम्मुहित अनुभूति प्राप्त होती थी | उन्होंने कई प्राचीन भारतीय धार्मिक तथा तत्वज्ञान के ग्रंथो का अनुवादन बंगाली में किया |

उन्होंने जाति प्रथा पर हल्ला बोलते हुए अंग्रेजी सर्कार को " सती" जैसी अन्द्धा श्रद्धा और "बालविवाह"  जैसे सामाजिक प्रथा को बंद करने लगाया | उन्होंने महिलाओ की सामाजिक एकता , विधवा विवाह और महिलाओ के विरासिया हक्क के लिए वकालत की |

वह एक अंतरराष्ट्रीय व्यक्तिमत्व थे और उन्होंने सभी जगहों पर आज़ादी का समर्थन किया |

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